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चाचा चौधरी के ‘प्राण’ की शादी थी मुश्किल…

कल्पना की उड़ान भरने में बड़ा मज़ा आता है। बच्चे सपनों में जीते हैं, कल्पनाओं में जीते हैं और बच्चों की कल्पनाओं को समझने के लिए उनकी तरह सोचना बहुत जरूरी है:                         काटूर्निस्ट प्राण

श्रीराम गुप्ता।।

स्वतंत्रता दिवस पर हम सबकी मीठी यादें हैं। बचपन की यादाें में  तिरंगा फहराने के बाद दोस्तों के साथ मिठाई खाना और टीवी पर परेड देखना आदि। पर देश की आजादी के इस महापर्व पर एक ऐसे व्यक्तित्व की याद भी जुड़ी है  जिसने हमारी कल्पना शक्ति को एक नई उड़ान दी। उनमें सुनहरा रंग भरा। रोचक तथ्य यह भी है कि हमारे बाल मन का वह चित्रकार भी देश विभाजन के दंश का भोगी रहा। हम बात कर रहे हैं भारत के वाॅल्ट डिज्नी कहे जाने वाले व चाचा चौधरी-साबू, बिल्लू-पिंकी जैसे कॉमिक किरदारों के रचियता प्राण कुमार शर्मा की। यदि वे आज हमारे बीच सशरीर मौजूद होते तो वे अपने जन्मदिवस की 81 वीं वर्षगांठ मना रहे होते। 6 अगस्त 2014 को उनका कैंसर से निधन हो गया। आइये जानते हैं उनसे जुड़ी कुछ रोचक जानकारियां-

समाचार पत्र से हुई थी शुरुआत:

  • प्राण कुमार शर्मा का जन्म 15 अगस्त 1938 को पाकिस्तान के लाहौर में हुआ था।
  • बंटवारे के बाद उनका परिवार मध्यप्रदेश के ग्वालियर में आकर बस गया।
  • भारतीय कॉमिक जगत के सबसे सफल और लोकप्रिय कार्टूनिस्ट  प्राण ने 1960 से कार्टून बनाने की शुरुआत की।
  • प्राण को सबसे ज्यादा लोकप्रिय उनके पात्र चाचा चौधरी और साबू ने बनाया।
  • सर्वप्रथम लोटपोट के लिए बनाये उनके ये कार्टून पात्र बेहद लोकप्रिय हुए और आगे चलकर प्राण ने चाचा चौधरी और साबू को केन्द्र में रखकर स्वतंत्र कॉमिक पत्रिकाएं प्रकाशित की।
  • उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र मिलाप से कार्टून बनाने की शुरुआत की थी।

कार्टून किरदारों में झलकाई भारतीयता

  •  प्राण ने मुंबई के सर जे जे स्कूल ऑफ आर्ट्स में प्रशिक्षण लिया व उसके बाद राजनैतिक विज्ञान में परास्नातक की डिग्री के अलावा उन्होंने फाइन आर्ट्स में चार वर्षीय डिग्री प्राप्त की।
  • प्राण के बनाए कार्टून चरित्र चाचा चौधरी और साबू घर-घर में लोकप्रिय किरदार बन गए।
  • चाचा चौधरी का किरदार उन्होंने सबसे पहले हिंदी बाल पत्रिका लोटपोट के लिए गढ़ा था, जो बाद में स्वतंत्र कॉमिक्स के तौर पर बेहद मशहूर हुआ।
  • भारतीय कॉमिक जगत के सबसे सफल कार्टूनिस्टों में से एक गिने जाने लगे।
  • प्राण पश्चिम के लोकप्रिय पात्रों सुपरमैन, बैटमैन, स्पाइडरमैन आदि से अलग हटकर भारतीय छाप वाले पात्रों की रचना करना चाहते थे, जो दिखने में सामान्य इनसान दिखें। इसीलिए काफ़ी
  • उन्होंने सामान्य से दिखने वाले छोटे कद के पगड़ीधारी बुजुर्ग चाचा चौधरी का किरदार गढ़ा।
  • चाचा चौधरी के दिमाग की तुलना कम्प्यूटर से की, जो अपनी चातुर्यता से हर समस्या का हल निकाल लेता था।
  • ज्यूपिटर ग्रह से साबू को लाकर चाचा चौधरी से दोस्ती करवाना भी पाठकाें को भी खूब भाया।
  • बलशाली दोस्त साबू के साथ अपराध के प्रति जागरुकता फैलाने का उनका यह फॉमूला सुपरिहट रहा, जो प्राण की पहचान बना।

मां ने कहा लड़की नहीं मिलेगी

  • प्राण के कार्टून प्रेम के कुछ रोचक किस्से भी जुड़े हुए हैं जिनमें से उनकी शादी का किस्सा काफी दिलचस्प है।
  • उनकी मां ने उनसें कहा कि वे कार्टून बनाएंगे तो उनसे कोई लड़की शादी नहीं करेगी।
  • प्राण ने एक साक्षात्कार में बताया था कि, ” उस वक्त जितनी भी कॉमिक्स बाजार में मौजूद थीं, उन सब में विदेशी चरित्र थे जैसे मेंड्रेक, ब्लॉंडी आदि । जब मैंने अपने माता-पिता को बताया कि मैं भी इस तरह के कार्टून बनाऊंगा तो उनकी पहली प्रतिक्रिया थी कि इससे तुम्हें कुछ हासिल नहीं होगा। कोई लड़की तुमसे शादी नहीं करेगी, लेकिन मैं तय कर चुका था और मैंने कार्टून बनाए।

चाचा चौधरी की प्रेरणा था यह महान राजनीतिज्ञ

  • प्राण की सोच पश्चिमी देशों से बिल्कुल अलग थी। वहां के हीरो का शारीरिक तौर पर शक्तिशाली, लंबा-चौड़ा, खूबसूरत, बांका जवान होना जरूरी था। लेकिन उनका  हीरो गंजा, बुड्ढा रहा। लेकिन उसकी ताकत उसका दिमाग है।
  • शुरुआत में चाचा चौधरी अकेले थे क्योंकि शुरू में समस्याएं छोटी थी। जैसे- चोरी, पॉकेटमारी, लेकिन बाद में समस्याएं बदलने लगीं। फिर उन्हें लगा कि चाचा चौधरी की अक्ल को शारीरिक ताकत देनी होगी। इस तरह साबू का जन्म हुआ।
  • वे बताते थे किचाचा  चौधरी का पात्र रचने के पीछे उनकी प्रेरणा थे महान राजनीतिज्ञ चाणक्य। वे चाहते थे कि उनका हीरो चाणक्य जैसा बुद्धिमान और तेज दिमाग वाला हो।

 भारत के वॉल्ट डिज्नी थे प्राण कुमार शर्मा

  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कार्टूनिस्ट्स ने वर्ष 2001 में उन्हें ‘लाइफ टाईम अचीवमेंट अवॉर्ड’ से नवाजा था।
  • ‘द वर्ल्ड एनसाइक्लोपीडिया ऑफ कॉमिक्स‘ में प्राण को ‘‘भारत का वॉल्ट डिज्नी’’ बताया गया है।
  • चाचा चौधरी की पट्टी अमेरिका स्थित कार्टून कला के अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय में लगी हुई है।
  • वर्ष 1995 में उनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्डस में दर्ज किया गया।
  • वर्ष 2015 में उन्हें भारत सरकार द्वारा मरणोपरांत पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

ऐसे याद आए पाठकों को उनके ‘प्राण’ 

  • मैं प्राण की कॉमिक्स पढ़कर बढ़ा हुआ। आगे चलकर मैंने फिल्मों में कई रोल निभाए, जो उनके कॉमिक्स पात्रों पर आधारित थे। – अनुपम खेर, अभिनेता
  •  हमारे बचपन को अपने कार्टून्स और कॉमिक्स से और खूबसूरत बनाने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया।

अविनाश आनंद, छात्र

  • हम डाक से मंगाकर प्राण साब की कॉमिक्स के किरदारों को पढ़ते थे। किताबों के बीच काॅमिक्स छिपाकर पढ़ते थे। पड़ोसियों को लगता कि हम खूब पढ़ाई करते हैं। हमारी पढ़ाई की तुलना के बाद उनके बच्चों की इसी बात को लेकर पिटाई तक हो जाती थी। प्राण नाम से पहचाने जाने वाला यह रचयिता अपने पीछे एक ऐसी विरासत छोड़ गया है, जिसका कोई सानी नहीं है। कॉमिक्स प्रेमियों का मानना है कि प्राण के जाने से कार्टूनों की दुनिया में एक ऐसा खालीपन पैदा हो गया है, जिसका भरना अब मुश्किल है।

-अनामिका शर्मा, अध्यापिका,पत्रकारिता विभाग,एमसीयू

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2 Comments

  1. Rohan Gupta Rohan Gupta August 14, 2018

    Awesome lyk always bhaiya jst keep going keep it up 😊

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