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बिछड़ गयी गुंदेचा बंधुओं की जोड़ी, रमाकांत गुंदेचा का निधन…

न्यूज़क्रस्ट संवाददाता।।

अपनी आवाज़ के जादू से श्रोताओं को अलौकिक दुनिया में ले जाने वाली गुंदेचा बंधुओं की जोड़ी बिछड़ गयी। ध्रुपद गायकी के लिए भारत ही नहीं अपितु अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले उमाकान्त-रमाकांत गुंदेचा में छोटे भाई श्री रमाकान्त गुंदेचा का शुक्रवार की शाम हृदय की लय थम जाने के कारण निधन हो गया।

भोपाल को दी विशेष पहचान

ध्रुपद गायकी के लिए वर्ष 2012 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री सम्मान प्राप्त गुंदेचा बंधुओं ने भोपाल गायन के क्षेत्र में विशेष पहचान दी है। सन 80 के दशक से हॄदयप्रदेश की राजधानी भोपाल में अपने सुरों की साधना और प्रस्तुति से उन्होंने श्रोताओं के बीच में खासी ख्याति प्राप्त की। अपने अथक प्रयास से गुरुकुल ध्रुपद संस्थान की शुरुआत की। इस संस्थान की स्थापना में स्व. रमाकान्त गुंदेचा ने अपने बड़े भाई उमाकान्त गुंदेचा का अतुल्यनीय सहयोग किया। आज इस संस्थान में देश-विदेश से आये स्वर साधक रियाज़ करते हैं।

कला प्रेमियों में शोक की लहर

शुक्रवार शाम श्री रमाकान्त गुंदेचा के निधन की सूचना कला जगत में प्रसारित हुई तो किसी को अपने कानों पर यकीन नहीं हुआ। गुंदेचा बंधुओं की यात्रा के साक्षी रहे कला साधक व लगभग छह दशक पुरानी संस्था अभिनव कला परिषद के संस्थापक सुरेश तांतेड़ ने बताया कि कला जगत को हुई अपूर्णीय क्षति का संदेश सत्य है। श्री तांतेड़ बताते हैं कि गुंदेचा बंधु की जोड़ी का यूँ बिछड़ना सभी को दुखी कर गया है। वे अपनी संवदेनाओं के चलते इस विषय पर अधिक बोल पाने में स्वयं को अक्षम पाते हैं। अंतर्राष्ट्रीय सितार वादक स्मिता नागदेव ने बताया कि यह दुःखद सूचना उन्हें भी अभी प्राप्त हुई है। उन्हें कल ही एक कार्यक्रम में सुना था और आज उनके दुनिया से जाने की खबर सुनी।रमाकान्त गुंदेचा जी का यूँ जाना भोपाल के लिए बड़ी क्षति है।

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