Press "Enter" to skip to content

डॉक्टर लाखन सिंह मरा नहीं करते…

मुझे आश्चर्य होता कि उम्र बढ़ने के साथ-साथ दुबली पतली काया वाला यह आदमी कितना काम करता है मप्र ज्ञान विज्ञान समिति में अनूप रंजन पांडेय, राजकमल नायक से लेकर चुन्नीलाल और न जाने किन-किन लोगों को साक्षरता आंदोलन में खींच कर लाए थे..

संदीप नाईक।।

सन 1990 की बात थी – दुनियाभर में अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता वर्ष मनाया जा रहा था। देशभर के समाजवादी लोग, एनजीओ के लोग और विभिन्न शैक्षिक संस्थाओं के लोग साक्षरता मिशन से जुड़ रहे थे। यह वही वर्ष था जब प्रोफेसर स्वर्गीय यशपाल ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष के पद पर रहते हुए साक्षरता मिशन भी जॉइन किया था।
प्रो.यशपाल ने आव्हान किया था कि एक वर्ष के लिये स्कूल कॉलेज और विश्व विद्यालय बन्द कर दो पहली बार देश में राष्ट्रीय साक्षरता मिशन की स्थापना की गई थी। और डॉक्टर लक्ष्मीधर मिश्र उसके पहले निदेशक बनाए गए थे। मध्यप्रदेश में हम लोग एकलव्य और भारत ज्ञान विज्ञान समिति के माध्यम से तत्कालीन मप्र के 45 जिलों में साक्षरता का काम अभियान के रूप में आरंभ कर रहे थे। डॉक्टर संतोष चौबे, डॉ विनोद रायना, अमिता शर्मा, स्व आर गोपाल कृष्णन (आय ए एस) आदि जैसे लोग इस मिशन की अगुवाई कर रहे थे और जिलों में जिला साक्षरता समितियाँ बनाई गई थी। देवास जिले का जिला संयोजक मैं था। देश भर के जत्थों के साथ मप्र भर में भी जत्थे निकले। नुक्कड़ नाटक से लेकर सायकिल यात्राएं और इतने काम हम लोगों ने किए कि आज सोचकर ही कंपकंपी आ जाती है और हिम्मत भी नही कि वो सब सोच भी सकें। राज्य स्तर पर पहले डॉक्टर विनोद रैना, फिर संतोष चौबे और बाद में मप्र खादी संघ से आये। खादी संघ के वरिष्ठ अधिकारी डॉक्टर लाखन सिंह ने राज्य संयोजक का दायित्व निभाया था। मुंगेली नाका, बिलासपुर, छग – बस इतना ही पता लाखन सिंह का था। लगभग 5 फीट की ऊंचाई, दुबला – पतला आदमी, तीखी और बुलंद आवाज़ और दृढ़ इरादों वाला हमेशा हंसता रहता। श्वेत दंत पंक्तियों की उज्ज्वल मुस्कान का यह छत्तीसगढ़िया जल्दी ही हम सबका साथी हो गया। लाखन सिंह ने बहुत काम किया। हमेशा खादी का कुर्ता पजामा, जैकेट पहनकर मुस्कुराते हुए काम करते थे। हम सब के साथी और साथ रहकर काम करने वाला यह शख्स गहरे सामाजिक सरोकार रखता था । लंबे समय तक लाखन सिंह से दोस्ती बनी रही । छत्तीसगढ़ विभाजन के बाद भी हम लोग मिलते जुलते रहे और ज्ञान विज्ञान समिति के माध्यम से अनेक राज्य स्तरीय कार्यक्रमों में हमारा मेलजोल होता रहा पिछले दिनों तक मैं जब भी छत्तीसगढ़ जाता लाखन सिंह से मिलकर आता था। बहुत ही सरल और सहज स्वभाव से थे। कभी रायपुर, कभी बिलासपुर, कभी अंबिकापुर, कभी विश्रामपुर, दंतेवाड़ा या जगदलपुर में मिल जाते और मुझे आश्चर्य होता कि उम्र बढ़ने के साथ-साथ दुबली पतली काया वाला यह आदमी कितना काम करता है। मप्र ज्ञान विज्ञान समिति में अनूप रंजन पांडेय, राजकमल नायक से लेकर चुन्नीलाल और न जाने किन-किन लोगों को साक्षरता आंदोलन में खींच कर लाए थे । तूहीन देव भी उनमें से एक थे। छत्तीसगढ़ अलग होने के बाद भी रायपुर के राज्य संसाधन केंद्र (प्रौढ़ शिक्षा) से जुड़े रहे और कई कार्यक्रमों में मुझे बुलाया। इन दिनों में वे छत्तीसगढ़ में पीयूसीएल का काम देख रहे थे और पिछली सरकार से जमकर कई मोर्चों पर लड़े थे। नई सरकार आने के बाद खुश नहीं थे और उनका कहना था कि आदिवासियों की हालत अभी भी वैसी ही है – जन अधिकार और नक्सलवाद के बीच आदिवासी पिस रहे हैं। वह लगातार मोर्चा ले रहे थे आज उनका दुखद समाचार मिला तो बहुत बेचैन हो गया हूं। लग ही नहीं रहा कि डॉक्टर लाखन सिंह हमारे बीच नहीं है। स्वर्गीय डॉक्टर लखन सिंह को सौ – सौ सलाम जोहार, प्यार और हार्दिक श्रद्धांजलि ऐसे प्यारे और प्रतिबद्ध लोग बहुत कम हुए हैं जो लंबे समय तक याद रखे जाते हैं और उनका काम हमेशा होता है – चाहे कितने भी वीभत्स तरीके से इतिहास को लिखा जाए विनोद रायना, लाखन सिंह जैसे लोग हमेशा अमर रहते हैं। उनका काम बोलता है और वह कभी नहीं मरते नमन , और श्रद्धा सुमन।

(डॉ लखन सिंह पर यह स्मृति लेख लेखक की फेसबुक वॉल से साभार।)

Be First to Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *