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दो राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त और एक दर्द का रिश्ता

राहुल चौकसे।।

क बीमारी जो ताउम्र शरीर को अपना घर बना ले, शरीर की सक्रियता को प्रभावित कर दे वो एक अलग दुनिया भी बना देती है। इस दूरी को आम भाषा में सक्षमता और अक्षमता का नाम दे दिया गया। पीड़ित को निःशक्त, अपंग, विकलांग, दिव्यांग अथवा विशेष दक्षता प्राप्त व्यक्ति की संज्ञा दे दी गयी। इन संज्ञाओं के साथ समाज का नज़रिया भी भिन्न हो जाता है। इस भिन्नता को दूर करने का, समानता लाने के प्रयास कर रहीं हैं पूनम श्रोती। इसी क्रम में उनका एक प्रयास है ‘Super10Qs with Poonam’।

देखें …Super10Qs with Poonam-

पूनम राष्ट्रपति सम्मान प्राप्त हैं। उन्हें यह सम्मान तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने स्वयं दिया था। पूनम को यह सम्मान भारत की शीर्ष 100 महिलाओं में शामिल होने के लिए दिया गया। पूनम ने तमाम विषम परिस्थितियों के बाद उच्च शिक्षा हासिल की है। वे डबल एमबीए हैं। पढ़ाई के बाद उन्होंने तकरीबन 6 साल नौकरी भी की। शिक्षा और नौकरी के दौरान दिव्यांगजनों के प्रति भेदभाव और सामाजिक चेतना में कमी देखते हुए पूनम ने उद्दीप वेलफेयर सोसाइटी की स्थापना की। वे अपनी संस्था के माध्यम से विशेष दक्षता प्राप्त लोगों के लिए समाज में समानता के लिए कार्य कर रही हैं। हाल ही में उन्होंने करीब 40 दिव्यांगजनों को प्रशिक्षण दिया है व उनके लिए रोजगार के अवसर में सहयोग भी कर रहीं हैं।

समाज में दिव्यांगजनों के प्रति वास्तव में बदलाव लाने व समानता दिलाने के उद्देश्य से पूनम ने ‘Super10Qs with Poonam’ साक्षात्कार की श्रृंखला शुरू की है। यह श्रृंखला न्यूज़क्रस्ट डॉट कॉम पर देखी जा सकती है। इस श्रृंखला की पहली कड़ी में पूनम ने तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा देवी पाटिल से सम्मान प्राप्त पूजा बी सुब्रमण्यम का साक्षात्कार किया है। पूजा बचपन से ‘शारकोट मैरी कोट’ नामक प्रोग्रेसिव डिसऑर्डर से पीड़ित हैं। इसमें उनके अंगों पर इसका असर उम्र के साथ बढ़ता जा रहा। तमाम तकलीफों के बावजूद पूजा एक उच्च शिक्षित व सफल उद्यमी होने के साथ कुशल गृहणी भी हैं।

यूं बना दर्द का रिश्ता

पूनम बताती हैं कि उनका हर दिव्यांगजन से एक दर्द का रिश्ता है। उसे वह शिद्दत से महसूस कर सकती हैं। वे कहती हैं कि,’जन्म से लेकर अब तक जो कष्ट झेले हैं, उससे एक दर्द उपजा है। यह दर्द हर दिव्यांगजन महसूस करता है। कई दफा समाज का दृष्टिकोण एक दर्द पैदा करता है। यह उस दृष्टिकोण को बदलने का प्रयास है। मैं अपने इस सीरीज में ऐसे ही दर्द को सामने लाने की कोशिश करूंगी,जिससे सुखद बदलाव आ सकें।’

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