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गैस पीड़ितों के इलाज के लिए बनाई जाए निगरानी समिति: सुको

न्यूज़क्रस्ट संवाददाता।।

1998 से 2003 के दौरान सुप्रीम कोर्ट में गैस राहत अस्पतालों में दी जा रही दवाओं की खराब गुणवत्ता और गैस पीड़ितों के इलाज की अनियमित्ताओ का संज्ञान लेते हुए यह आदेश किया कि गैस पीड़ितों को उनके सही इलाज के संवैधानिक अधिकार की सुरक्षा के लिए निगरानी समिति बनाई जाए जिसमे पीड़ितों के संगठनों की नुमाइंदगी हो | इस दौरान मंत्रीत्व काल में 150 से भी कम गैस पीड़ितों को रोजगार नहीं मिला | यह भी उल्लेखनीय है कि अमरीकी यूनियन कार्बाइड और उसके मालिक डाव केमिकल को परित्यक्त कारखाने एवं उसके आस पास के मिट्टी एवं भूजल को प्रदूषित करने की कानूनी जिम्मेदारी से बचाने के लिए, मंत्री महादोय ने सार्वजनिक रूप से गलास भर के हैंडपंप का प्रदूषित पानी पिया था | यह तब जबकि 2003 तक 5 सरकार एवं 6 गैर सरकारी वैज्ञानकि संस्थाए मिट्टी और भूजल में अत्यंत जहरीले रसायन एवं भारी धातु की मौजूदगी प्रमाणित कर चुके थे |

जहाँ तक इन्तजार -ए-इंसाफ के आयोजक चार गैस पीड़ित संगठनों के नेताओ की बात है, उनमें अंतराष्ट्रीय गोल्डमैन एन्वायरोमेन्टल एवार्ड से विभूषित, यूनिवर्सिटी आफ मिशिगन से स्नातक, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से गोल्स मेडल एवं स्कॉटलैण्ड के क्वीन मार्गारेट विश्वविद्यालय एडिनबर्ग से मानद डॉक्टरेट की उपाधी प्राप्त व्यक्ति शामिल हैं । चाहे तो मन्त्री महोदय ये तथ्य जाँच करवा लें।

अब मंत्री जी द्वारा मीडिया को दिए गए बयान पर आते हैं।
संगठनों पर लगाए गए आरोपों के सम्बन्ध में हम मन्त्री महोदय को यह बताना चाहते हैं की अगर वे अपने बात के पक्के हैं तो किसी समय सीमा के अन्दर एक भी आरोप साबित करके दिखाएँ। चुनाव पूर्व उनके द्वारा हर गैस पीड़ित को ५ लाख रुपया मुआवज़ा दिलवाने के वादे के सम्बन्ध में साफ़ तौर पर कुछ बोलने से बचते हुए उन्होंने मुआवज़ा राशि की बात सर्वोच्च न्यायालय पर छोड़ा है | आशा है उनके मन्त्रालय का कोई जानकार अधिकारी उन्हें यह समझाने में सफल होगा की सर्वोच्च न्यायालय मुआवज़ा की राशि का निर्णय यूनियन कार्बाइड गैस काण्ड की वजह से हुई मौतों और बीमारियों के बारे में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा पेश किए गए आँकड़ो के आधार पर करेगी। यदि मन्त्री महोदय अपने चुनावपूर्व वादे के प्रति वाकई वचनबद्ध हैं तो वे अतिरिक्त मुआवज़े की याचिका पर अप्रैल में सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई अप्रैल माह में होने से पहले ये आंकड़े सुधरवाएँ और साथ ही केंद्र सरकार से यह मांग करे की अदालत के फैसले का इंतज़ार न करते हुए प्रत्येक गैस पीड़ित को उसी तरह ५ लाख रूपए दिलवाएं जिस तरह कैंसर ग्रस्त पीड़ितों को २ लाख रूपए की एक्स ग्रेशिया राशि दी जा रही है।

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