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पैडमेन से नहीं मिलने का है मलाल पैडविमेन को ….

राष्ट्रीय युवा सम्मेलन में पहुंचे सफल युवाओं ने सुनाई अपनी कहानी

राष्ट्रपति पुरुस्कार प्राप्त पूनम ने बताई दिव्यागों की व्यथा

न्यूज़क्रस्ट संवाददाता।।

अगर कुछ कर गुजरने का जज़्बा हो तो कोई बंधन रास्ता नहीं रोक सकता है। इसी संदेश को चरितार्थ करते हुए तमाम बाधाओं के बावजूद सफल हुए युवाओं ने अपनी कहानी सुनाई। मौका था मध्यप्रदेश की राजधानी में आयाेजित हुए राष्ट्रीय युवा सम्मेलन का। रविवार को आयोजित इस कार्यक्रम में शामिल हुईं पैडविमेन ने पैडमेन की भूमिका निभा चुके अभिनेता अक्षय कुमार से नहीं मिल पाने का अफसोस भी ज़ाहिर किया।

राजधानी के कैम्पियन स्कूल में आयोजित इंडियन यूथ कान्क्लेव 2019 कार्यक्रम में मोटिवेशनल स्पीकर तथा सामाजिक कार्यकर्ता दिव्यांग पूनम श्रोती ने अपने संघर्ष पर प्रकाश डालते हुए श्रोताओं को भावुक कर दिया।  भारत की पैड वीमेन के नाम प्रसिद्ध हेमलता और जमुना, उभरते हुए सिंगर स्टेबिन बेन ने युवाओं से अपनी कहानी साझा की । इस अवसर पर मंच पर मौजूद अतिथियों ने श्राेताओं के सवालों के जवाब भी दिए।

विकलांग को हीन भावना से देखना दयनीय 

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के हाथों सम्मानित तथा भारत की सौ ताकतवर महिलाओं में शामिल पूनम श्रोती ने कहा कि अगर समाज विकलांग को हीन भावना की नजर से देखता है, तो यह बहुत ही दयनीय स्थिति है। अपने आप पर यकीन करो, और वह कार्य तब तक करो, जब तक कि तुम्हें सफलता न मिल जाये। अगर सामान्य लोग सोचते हैं कि विकलांग भी आम लोगों की तरह काम कर सकते हैं तो वह समाज के लिए सुखद अनुभव होगा। गांधी जी ने कहा था कि “Be the Change you want see in  the world”। उन्होंने कहा कि व्हीलचेयर मेरी कमजोरी नहीं है। यह मेरी ताकत है। साथ ही यह  मेरे जैसे दुनिया के सभी विकलांगों की भी ताकत है। आप सभी का रिएक्शन देखकर ही मेरे जैसे अनेक विकलांगो को प्रोत्साहन मिलता है। खुद को प्रोत्साहित करने के लिए मैं रोज सुबह नई-नई चुनौतियों के साथ उठती हूँ। उन्होंने मूलमंत्र देते हुए कहा कि कभी भी जीवन में लगे कि आप कुछ नहीं कर सकते हैं तो मेरे बारे में जरुर सोचना। आप के अंदर जुनून आएगा।  आप सब कुछ कर सकेंगें। जब मैं छोटी थी तो लोग मुझ पर हँसते थे। तब पापा ने बोला कि बेटा तुम्हें लाखों की भीड़ में अलग दिखना है। और आज मैंने समाज में यह साबित किया है कि मैं वाकई स्पेशल हूं।

 

पैसे बचाना अच्छी बात, पर पैडमेन से नहीं मिलने का है अफसोस

भारत में पैड विमेन के नाम से विख्यात हेमलता  ने बताया कि जब पहली बार उन्होंने अपने मेहनत से 100 रुपये की बचत की तो उनके पति ने शाबाशी दी। हेमलता ने पेड बनाने की मशीन खरीदने के लिए ग्रामसभा से पैसे उधार लिए। शुरुआत में घर के सदस्यों द्वारा बाहर निकलने पर पाबंदी लगाई जाती थी। जब मैं एक समूह से जुड़ी तब मुझे पता चला कि माहवारी के समय महिलाओं द्वारा गंदा कपड़ा इस्तेमाल करने के कारण वे कई तरह के गंभीर बीमारियों से ग्रसित हो जाती हैं। उनमें से ज्यादातर की  मौत तक हो जाती है। जब मेरे जैसी साधारण महिला शिविरों में घूम-घूम कर पेड की दुकान लगा सकती है। इसका इस्तेमाल कर सकती है तो अन्य महिलाएं यह काम क्यों नही कर सकती हैं? हम पेड बना सकते हैं तो, समाज को रास्ता भी दिखा भी सकते हैं।

दृढ़ निश्चय को हिला नहीं पाये

पेड विमेन जमुना ने बताया कि शुरू के दिनों में मेरा बहुत विरोध हुआ। लोग कहते थे कि यह समाज मे गंदगी फैला रही है। कई बार तो ग्रामीण मुझे मारने तक के लिए आते थे और मेरी मशीन को भी नुकसान पहुँचते थे। लेकिन वे मेरे मनोबल को नहीं डिगा पाये। समय गुजरने के साथ ही विरोध होना भी बंद हो गया। उनसे बात करने पर यह जानकारी प्राप्त हुई उनके जीवन पर आधारित फिल्म पेडमेन के अभिनेता अक्षय कुमार से अभी तक उनकी मुलाकात नहीं हो पाई है। उन्हें इसका मलाल है।

परिवार को झूठ बोलकर पहुंचा था मुंबई, रहा भूखा

स्कूल में टीचर की बात को दिल से लगा बैठे सिंगर स्टेबिन बेन ने बताया कि मुंबई में उन्होंने छह साल तक संघर्ष किया। परिवार से झूठ बोलकर कि मुझे मुंबई में अवसर मिल गया है भोपाल से मुंबई चला गया। कई दिनों तक कोई काम नहीं मिला। छोटे मोटे बैंड में गाकर गुजारा करता रहा। रियलटी शो में भाग लेता रहा। मेहनत रंग लाई। आतिफ असलम को मिलने वाला एक मशहूर गाना निर्देशक के कहने से मुझे मिल गया। यह एक सुखद मोड़ साबित हुआ। आज पीछे मुड़कर देखता हूँ तो मुझे मेरा संघर्ष बहुत अच्छा लगता है। वह प्रेरणादायी है।

 

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