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ये कौन चित्रकार है !

ध्रुव गुप्त।।

दीवारों पर रंगों की नदियों जैसी लहरदार पेंटिंग्स की कुछ तस्वीरों ने कल मुझे विस्मय में डाल दिया था। मैंने गूगल से इसके कलाकार के बारे में जानना चाहा तो यह जानकार हैरान रह गया कि यह अद्भुत कलाकृति किसी मनुष्य ने नहीं, खुद हमारी प्रकृति ने बनाई है।

रूस के येकातेरिनबर्ग में मीलों लंबी कई निर्जन सुरंगें ऐसी असंख्य कलाकृतियों से भरी पड़ी है। पिछली सदी में पहली बार जब इन अज्ञात सुरंगों की तस्वीरें रूस के एक खोजी छायाकार मिखाइल मिशेनिक ने ज़ारी की तो दुनिया के कलाप्रेमियों में हलचल मच गई। वैज्ञानिक शोध से पता चला कि इन सुरंगों की दीवारों पर यह अद्भुत चित्रकारी लाखों साल पुरानी है जो नमक के एक समुद्र के सूख जाने से बनी थी।

समुद्र के सूख जाने के बाद सुरंगों की दीवारों पर करनालाईट नाम का एक खनिज पदार्थ जमा रह गया जिसका रंग पीला-सफ़ेद या लाल-नीला होता है। समुद्र की लहरों के कारण इस खनिज की घुमावदार पैटर्न्स से ये बहुरंगी कलाकृतियां बनी हैं। इन अद्भुत सुरंगों को साइकेडेलिक साल्ट माइन्स कहा जाता है।

प्रकृति की इस अद्भुत कृति को संरक्षित रखने के लिए और लोगों को जहरीले गैस और लैंडस्लाइड के खतरों से बचाने के लिए वहां पर्यटकों को नहीं जाने दिया जाता। वहां सिर्फ खोजकर्ताओं और वैज्ञानिकों की पहुंच हो सकती है जिन्हें वहां जाने के लिए रूस सरकार से एक विशेष परमिट लेनी होती है।

सच है, हमारी प्रकृति से बड़ा कलाकार कोई हो ही नहीं सकता !

(लेखक साहित्यकार व रिटायर्ड आईपीएस हैं। उनके सोशल मीडिया पोस्ट से साभार।)

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