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‘ह्वाइट टाइगर्स स्क्वैड्रन’ जी हाँ..रीवा के सफेद बाघों को समर्पित है समुंदर का ये हरावल दस्ता

मेरी स्मृति में पुरानी यादें ताजा हो आई। वर्ष 1984 में मैं गया तो मुम्बई नवभारत टाइम्स में ट्रेनीज के लिए पर जाना नेवी की जिंदगी को करीब से।बात ये थी कि जबलपुर के मेरे मित्र सतीश कुमार सिंह नेवी में आईएनस विक्रांत में तैनात थे। मैं उनका मेहमान था।

जयराम शुक्ल।।

एयर स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान को यदि किसी ने सबसे ज्यादा खौफ में रखा है तो वह है हमारी नेवी। इसी नेवी में सबसे जाबांज स्क्वैड्रन का नाम है ‘ह्वाइट टाइगर्स’। जी हाँ रीवा के सफेद बाघों को समर्पित है समुंदर का ये हरावल दस्ता।

अथाह समुद्र की लहरें और उन पर तैरते युद्धपोत मुझे हमेशा रोमांचित करते रहे। पिछले साल जी न्यूज के योद्धा रिपोर्टर कृष्णमोहन मिश्र ने सेवानिवृत्ति हो रहे आईएनएस विराट पर जिस तरह भावपूर्ण रिपोर्टिंग पेश की थी ‘फेसबुक’ ने आज फिर उस स्मृति को जीवंत कर दिया। यकीन मानिए देखकर गर्वाश्रु निकल आए।

मेरी स्मृति में पुरानी यादें ताजा हो आई। वर्ष 1984 में मैं गया तो मुम्बई नवभारत टाइम्स में ट्रेनीज के लिए पर जाना नेवी की जिंदगी को करीब से।बात ये थी कि जबलपुर के मेरे मित्र सतीश कुमार सिंह नेवी में आईएनस विक्रांत में तैनात थे। मैं उनका मेहमान था।

सतीश विक्रांत में रहते भी थे लिहाजा मेरे रहने की व्यवस्था नेवीनगर में अपने साथी के फ्लैट में करवा दी। विक्रांत टाइगर गेट के पास लंगर डाले था। सतीश मुझे विक्रांत घुमाने ले जाते थे।

पहली बार जाना कि जहाज में ही पूरी छावनी बसी है। सेलर्स के लिए अलग बैरक तो अधिकारियों के लिए केबिन। वहीं खान.पान मनोरंजन खेल मैदान कैंटीन सब।

कभी-कभी तो छह छह महीने यहीं गुजरते थे। ऊपर विशालकाय डेक से फाइटर प्लेन कैसे उडान भरते हैं ओर फिर इनके डैने समेटकर किस तरह ट्रैक्टर टोचन करके जहाज में ही बने गैरज में सहेजते हैं यह भी देखा।

विक्रांत के अधिकारियों ने गर्वपूर्वक पराक्रम की कहानियां बताईं। यह भी बताया कि..कालापत्थर..फिल्म के उस दृश्य की शूटिंग भी इसी के डेक में हुई थी जिसमें नेवी कैप्टन बने अमिताभ बच्चन का कोर्ट मार्शल किया गया था।

विराट की चर्चा उन्हीं दिनों चल रही थी कि रायल ब्रिटिश नेवी का एक वारशिप फ्लीट में शामिल होने वाला है। कोई चार साल बाद जब फिर मुंबई जाना हुआ तो विराट को भरपूर निहारा व देखा।

इसके खासियत की विराटता के बारे में भी समझा। अभी पिछले वर्ष जब ह्वाइट टाईगर पर किताब लिख ही चुका था और वह.छपने की प्रक्रिया मे थी तभी कृष्णमोहन ने जानकारी दी की नेवी के एक लड़ाकू स्क्वैड्रन का नाम ‘ह्वाइट टाइगर्स’ है, उसका मुख्यालय गोवा में है।

तभी यह जानकारी मिली कि ह्वाइट टाइगर मोहन की एक संतान को 1967 में इन्डियन नेवी को उपहार स्वरूप दिया गया था और उसे नेवी के हरावल दस्ते का शुभंकर बनाया गया है।

कृष्णमोहन ने उस फ्लीट की एक कैप भी मुझे दी। संभवतः यह उन्हें उपहार में मिली थी। बहरहाल जब विराट जैसे मूक महाबली यांत्रिक योद्धा के गौरव की गाथा सुनने को मिलती है तो छाती गर्व से फूल जाती है…सैल्यूट “ह्वाइट टाइगर्स..’ अलविदा विराट।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। लेख उनकी फेसबुक पोस्ट से साभार।)
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