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कैदियों से रुबरु हुईं राष्ट्रपति सम्मान प्राप्त पूनम, तो कैदियों ने पूछ डाले यह सवाल…

काजल थारवानी।।

‘लोग तनाव में आकर आत्महत्या कर लेते हैं। आप भी कभी तनाव में आए होंगे। क्या आपको कभी आत्महत्या का विचार नहीं आया।’

पहली बार में आपको यह आम सवाल लगेगा लेकिन यह संवाद दो आम लोगों के मध्य नहीं हुआ है। आपको बता दें कि यह सवाल एक सजायाफ्ता कैदी द्वारा दिव्यांग प्रेरक वक्ता से पूछा गया। भोपाल के केन्द्रीय कारावास में मंगलवार को आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रपति सम्मान प्राप्त पूनम श्रोती ने करीब पांच सौ कैदियों को बेहतर इंसान बनने के साथ सम्मानपूर्वक जीवन जीने के तरीके बताया।

जब मैं कर सकती हूं तो आप क्यों नहीं…

केन्द्रीय कारावास में अपने अपराधों की सजा भुगत रहे कैदियों का दिन मंगलवार को कुछ अलग रहा। कैदियों को अपनी पैदाइश से हडि्डयों की बीमारी ऑस्टियोजेनेसिस इम्परफेक्टा से पीड़ित 34 वर्षीया पूनम से रुबरु होने का अवसर प्राप्त हुआ। जेल परिसर में स्थित सभागृह में आयोजित कार्यक्रम में पूनम ने उन्हें अपने जीवन में आए उतार चढ़ाव व संघर्षों का उदाहरण देते हुए सकारात्मक संदेश दिए। कैदियों में उर्जा का संचार तब देखने मिला जब दिव्यांगों के लिए समानता व उनके उन्नयन के लिए कार्य कर रही पूनम ने कैदियों को जीवन को नये नज़रिए से देखने के मंत्र साथ कहा कि – ‘जब मैं कर सकती हूं तो आप क्यों नहीं? इस पर कैदियों ने खुद को बदलने का वचन भी पूनम को दिया।

दोष सिद्ध नहीं हुआ है,पर कैरियर भी बनाना है…

तकरीबन बीस वर्ष के संतोष (परिवर्तित नाम) ने सवाल-जवाब के दौरान पूनम से पूछा कि मेरा अपराध अभी सिद्ध नहीं हुआ है और मुझे कैरियर भी बनाना है। मैं क्या करुं? इस पर पूनम ने जवाब दिया कि विधिवत न्याय में विश्वास रखो। यहां जेल में पुस्तकालय है। समय का सदुपयोग करें। पढ़ाई जरुर जारी रखें। विश्वास रखें कि कैरियर जरुर बनेगा। तनाव में आत्महत्या पर सवाल के उत्तर में पूनम ने जवाब दिया कि आत्महत्या कोई समाधान नहीं है। यह उन लोगों के लिए समस्या की शुरुआत है जिन्हें आपकी जरुरत है। जब भी गुस्सा आए तो खुद को समय दें। सकारात्मक सोच रखें। मन को शांत रखें। खुद से पूछें कि क्या यहीं रुक जाना ही जिन्दगी का मकसद था।

नई जिंदगी होगी शुरु…

एक कैदी ने पूनम से सभी के लिए एक संदेश देने की दरख़्वास्त की। इस पर पूनम ने कहा कि इसे कैद नहीं समझें। यहां चिंतन कीजिए। यहां से जाकर आप कैसे बेहतर ज़िन्दगी जी सकते हैं। समाज के लिए क्या बेहतर कर सकते हैं। यह आपसे बेहतर कोई नहीं समझ सकता है। यकीन रखें कि सकारात्मक रुप से हुई नई शुरुआत आपके लिए नई उर्जा से भरी नई जिंदगी के रास्ते खोल देगी।

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One Comment

  1. h.p.malviya Bhopal m.p. h.p.malviya Bhopal m.p. March 6, 2019

    भारत मे 40% डाटा.,45%पेट्रोल फालतू ही बेस्ट किया जाता है ….परिणाम त: प्रकृतिक क्षरण चरम पर है.
    कचरा स्वयं साफ करना होगा .पहले दिमाग का तदुपरांत समाज का …तब ही भारत का विकास होगा …हम अपनी आपनी जिम्मेदारी समझे यही सवोँत्तम हैं.

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