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गृहमंत्री राजनाथ करेंगे अंतर्राष्ट्रीय सीमा से लगी बोल्ड-क्यूआईटी परियोजना का उद्घाटन

  • इससे पूर्व, गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने पिछले वर्ष सितंबर महीने में जम्मू में भारत- पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर प्रत्येक 5 किलोमीटर पर 2 स्मार्ट बाड़ लगाने वाली पायलट परियोजनाओं का उद्घाटन कर चुके हैं।

न्यूज़क्रस्ट संवाददाता ||

भारत के केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह कल असम के धुबरी जिले में भारत- बांग्लादेश सीमा पर सीआईबीएमएस (व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली) के तहत बोल्ड- क्यूआईटी (बॉर्डर इलेक्ट्रोनिकली डोमिनेटेड क्यूआरटी इंटरसेप्शन टेक्निक) परियोजना का उद्घाटन करेंगे।सीमा सुरक्षा बल बांग्लादेश के साथ 4096 लंबी अंतर्राष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा के लिए उत्तरदायी है। विभिन्न स्थानों पर भूगोलिक बाधाओं के कारण सीमा बाड़ लगाना संभव नही है।

समस्या धुबरी जिले की

असम के धुबरी जिले में सीमा क्षेत्र का 61 किलोमीटर का हिस्सा, जहां ब्रहमपुत्र नदी बांग्लादेश में प्रवेश करती है, विशाल भू-भाग और अनगिनत नदी चैनलों से मिलकर बनता है जिससे इस क्षेत्र में विशेष रूप से बरसात के मौसम में, सीमा की रखवाली एक दुष्कर कार्य बन जाता है।

इस समस्या से निपटने के लिए गृह मंत्रालय ने वर्ष 2017 में बीएसएफ के जवानों की वास्तविक उपस्थिति के अतिरिक्त प्रौद्योगिकीय समाधान का भी निर्णय लिया।  जनवरी 2018 में बीएसएफ की सूचना एवं प्रौद्योगिकी शाखा ने बोल्ड- क्यूआईटी परियोजना आरंभ की और विभिन्न विनिर्माताओं और आपूर्तिकर्ताओं की तकनीकी सहायता से इसे रिकार्ड समय में पूरा कर लिया।

क्या है क्यूआईटी सीआईबीएमएस तकनीक

बोल्ड- क्यूआईटी सीआईबीएमएस  के तहत तकनीकी प्रणाली स्थापित करने की एक परियोजना है जो ब्रहमपुत्र एवं इसकी सहयक नदियों के बिना बाड़ वाले नदी क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के सेंसर से सुसज्जित करता है। अब ब्रहमपुत्र नदी के समस्त क्षेत्र को माइक्रोवेव कम्युनिकेशन, ओएफसी केबल्स, डीएमआर कम्युनिकेशन, दिन और रात निगरानी कैमरों और घुसपैठ का पता लगाने वाली प्रणाली द्वारा उत्पन्न डेटा नेटवर्क के साथ कवर कर लिया गया है।

ये है खासियत

  • ये आधुनिक गैजेट सीमा पर बीएसएफ कंट्रोल रूम को फीड्स प्रदान करते हैं और अवैध सीमा पार करने / अपराधों की किसी भी आशंका को विफल करने में बीएसएफ त्वरित कार्रवाई टीमों को सक्षम बनाते हैं।
  • इस परियोजना का कार्यान्वयन बीएसएफ को न केवल सभी प्रकार के सीमा पार अपराधों पर अंकुश लगाने में सहायता प्रदान करेगा बल्कि टुकड़ियों को 24 घंटे मानव निगरानी से भी राहत मिलेगी।
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