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अटल बिहारी वाजपेयी ने 25 बार देखी थी हेमा मालिनी की यह फिल्म

प्रसिद्ध अभिनेत्री और नृत्यांगना हेमा मालिनी बॉलीवुड की उन गिनी, चुनी अभिनेत्रियों में शामिल हैं, जिनमें सौंदर्य और अभिनय का अनूठा संगम देखने को मिलता है। लगभग चार दशक के करियर  में उन्होंने कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया। करियर के शुरुआती दौर में उन्हें वह दिन भी देखना पड़ा था , जब एक निर्माता-निर्देशक ने उन्हें यहां तक कह दिया  कि उनमें स्टार अपील नहीं है। बदलते वक़्त के साथ  हेमा ने अपनी मेहनत का सिनेमा जगत में लोहा मनवाया। मालिनी को जल्द ही लोगों ने “ड्रीम गर्ल” के रूप में नयी पहचान दिलवाई। 1977 में उन्होंने ड्रीम गर्ल के नाम से ही बहुत सी फिल्मों में काम भी किया है। अपने फ़िल्मी करियर में उन्होंने कयी तरह के किरदार निभाए । अब तक वे तक़रीबन 150 फिल्मों में दिख चुकी है। अपने करियर के दौरान, मालिनी का 11 बार फिल्मफेयर की बेस्ट एक्ट्रेस अवार्ड के लिए उनके नाम को नॉमिनेट किया गया।  1972 में उन्हें यह अवार्ड भी मिला । 2000 में मालिनी को फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया। भारत सरकार की तरफ से हेमा को पद्म श्री के अवार्ड से भी सम्मानित किया गया ।

जब एक्टिंग के लिए हेमा ने छोड़ी पढ़ाई – 

 हेमामालिनी जी का जन्म तमिलियन परिवार में 16 अक्टूबर 1948 को अम्मनकुडी तमिलनाडु में हुआ। उनके पिता का नाम वीएसआर चक्रवर्ती है। उनकी माँ का नाम जया चक्रवर्ती है, जो  एक फिल्म निर्माता थीं। घर में फिल्मी माहौल होने से हेमा मालिनी का झुकाव भी फिल्मों की ओर हो गया। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा चेन्नई से पूरी की। वर्ष 1961 में हेमा मालिनी को एक लघु नाटक पांडव वनवासम में बतौर नर्तकी काम करने का अवसर मिला। बचपन से ही हेमा मालिनी बहुत होशिहर थीं।उन्होंने आंध्र महिला सभा, चेन्नई में दाखिला लिया। जहाँ उनका पसंदीदा विषय इतिहास था। इसके बाद हेमा मालिनी ने डी.टी.इ.ए. मंदिर मार्ग से पढाई पूरी की। एक्टिंग में करियर बनाने के लिए उन्होंने 12 वीं कक्षा के बाद ही पढ़ना छोड़ दिया। धर्मेन्द्र के साथ 1979 में उन्होंने शादी कर ली । उस समय धर्मेन्द्र पहले से ही विवाहित थे और उन्हें बच्चे भी थे। जिनमें से दो बॉलीवुड अभिनेता सनी देओल और बॉबी देओल हैं। मालिनी और धर्मेन्द्र की दो संतान हैं , एक बॉलीवुड अभिनेत्री ईशा देओल और अहाना देओल।

 जब डायरेक्टर को हेमा में नहीं नजर आई थी स्टार अपील, ऐसे बनीं ड्रीम गर्ल –

हेमा मालिनी ने जब फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा ही था। तब तमिल निर्देशक श्रीधर ने उन्हें अपनी फिल्म में काम देने से यह कहते हुए इन्कार कर दिया कि उनमें स्टार अपील नहीं है। बाद में सत्तर के दशक में  श्रीधर ने उनकी लोकप्रियता को भुनाने के लिए उन्हें लेकर 1973 में गहरी चाल फिल्म का निर्माण किया। हेमा मालिनी फिल्म इंडस्ट्री में जगह बनाने के लिए 1968 तक संघर्ष करती रहीं लेकिन उन्हें काम नहीं मिला। वह साल उनके सिने कैरियर का सुनहरा वर्ष साबित हुआ। जब उन्हें सुप्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक और अभिनेता राजकपूर की फिल्म सपनों का सौदागर में पहली बार नायिका के रूप में काम करने का मौका मिला। फिल्म के प्रचार के दौरान हेमा मालिनी को ड्रीम गर्ल के रूप में प्रचारित किया गया। बदकिस्मती से फिल्म टिकट खिड़की पर असफल साबित हुई लेकिन अभिनेत्री के रूप में हेमा मालिनी को दर्शकों ने खूब पसंद किया । हेमा मालिनी को पहली सफलता वर्ष 1970 में प्रदर्शित फिल्म जॉनी मेरा नाम से हासिल हुई। इसमें उनके साथ अभिनेता देवानंद मुख्य भूमिका में थे। फिल्म में हेमा और देवानंद की जोड़ी को दर्शकों ने सिर आंखों पर लिया और फिल्म सुपरहिट रही।

जब मुमताज़ के दुर्भाग्य ने हेमा को बनाया सुपरस्टार –

हेमा मालिनी को प्रारंभिक सफलता दिलाने में निर्माता – निर्देशक रमेश सिप्पी की फिल्मों का बड़ा योगदान रहा। वर्ष 1972 में हेमा मालिनी को रमेश सिप्पी की ही फिल्म सीता और गीता में काम करने का अवसर मिला जो उनके सिने कैरियर के लिए मील का पत्थर साबित हुई। इस फिल्म की सफलता के बाद वह शोहरत की बुंलदियों पर जा पहुंचीं। इस फिल्म में दमदार अभिनय के लिए हेमा को  सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। रमेश सिप्पी निर्देशित फिल्म सीता और गीता में जुड़वा बहनों की कहानी थी। हेमा मालिनी के लिए यह किरदार काफी चुनौती भरा था लेकिन उन्होंने अपने सहज अभिनय से न सिर्फ इसे अमर बना दिया बल्कि भविष्य की पीढ़ी की अभिनेत्रियों के लिए इसे उदाहरण के रूप में पेश किया। बाद में इसी से प्रेरित होकर फिल्म चालबाज का निर्माण किया गया। जिसमें दोहरी भूमिका वाली बहनों का किरदार श्रीदेवी ने निभाया। हेमा मालिनी सीता और गीता से फिल्म इंडस्ट्री में शोहरत की बुलंदियों पर पहुंची लेकिन दिलचस्प बात यह है कि फिल्म के निर्माण के समय निर्देशक रमेश सिप्पी नायिका की भूमिका के लिए मुमताज का चयन करना चाहते थे। लेकिन किसी कारण से वह यह फिल्म नहीं कर सकी। बाद में हेमा मालिनी को इस फिल्म में काम करने का अवसर मिला।

जब अपने आलोचकों का हेमा ने किया मुँह बंद –

वर्ष 1975 हेमा मालिनी के सिने करियर का अहम पड़ाव साबित हुआ। उस वर्ष उनकी संन्यासी धर्मात्मा खूशबू और प्रतिग्या जैसी सुपरहिट फिल्में प्रदर्शित हुई। उसी वर्ष हेमा मालिनी को अपने प्रिय निर्देशक रमेश सिप्पी की फिल्म शोले में काम करने का मौका मिला। इस फिल्म में अपने अल्हड़ अंदाज से हेमा मालिनी ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। फिल्म में हेमा मालिनी के संवाद उन दिनों दर्शकों की जुबान पर चढ़ गए। सत्तर के दशक में हेमा मालिनी पर आरोप लगने लगे कि वह केवल ग्लैमर वाले किरदार ही निभा सकती है लेकिन उन्होंने खुशबू (1975) किनारा (1977) और मीरा (1979) जैसी फिल्मों में संजीदा किरदार निभाकर अपने आलोचकों का मुंह हमेशा के लिए बंद कर दिया। इस दौरान हेमा मालिनी के सौंदर्य और अभिनय का जलवा छाया हुआ था। इसी को देखते हुए निर्माता प्रमोद चक्रवर्ती ने उन्हें लेकर फिल्म ड्रीम गर्ल का निर्माण तक कर दिया।

अटल बिहारी वाजपेयी ने 25 बार देखी थी हेमा मालिनी की यह फिल्म, मिलने वक्त कुछ ऐसी थी हालत-

देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी हेमा मालिनी के प्रशंसक थे। हेमा मालिनी ने यह बात खुद एक कार्यक्रम के दौरान कही थी। हेमा मालिनी ने बताया  कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को उनकी एक फिल्म इतनी ज्यादा पसंद आ गई थी कि उन्होंने उसे 25 बार देखी थी। उन्होंने बताया मुझे याद है एक बार मैंने पदाधिकारियों से कहा कि मैं भाषणों में अटल बिहारी वाजपेयी का जिक्र करती हूं , लेकिन उनसे कभी मिली नहीं, मिलवाइए। तब वो मुझे उनसे मिलाने ले गए, लेकिन मैंने महसूस किया कि अटल बिहारी वाजपेयी बात करने में कुछ हिचकिचा रहे हैं। इस पर मैंने वहां मौजूद एक महिला से पूछा, क्या बात है। अटल जी, ठीक से बात क्यों नहीं कर रहे। उन्होंने बताया असल में ये आपके बहुत बड़े प्रशंसक रहे हैं।  इन्होंने 1972 में आई आपकी फिल्म ‘सीता और गीता’ 25 बार देखी थी।  आज अचानक आपको सामने पाकर हिचकिचा रहे हैं।

हेमा मालिनी का फिल्म सफ़र  –

  • 1963 में आयी फिल्म इधु साथियम में बतौर सह-अभिनेत्री उन्होंने अपने फ़िल्मी करियर की शुरुवात की थी।  इसके बाद उन्होंने वनवासम (1965) फिल्म भी की । इसके बाद मालिनी 1968 में सपनो के सौदागर में राज कपूर के साथ मुख्य भूमिका में दिखी। उनकी इसी फिल्म में उन्हें बॉलीवुड में “ड्रीम गर्ल” के रूप में पहचान दिलवाई।
  • 1970 में उन्होंने जॉनी मेरा नाम जैसी सफल फिल्मे की और इस समय में उन्होंने बहुत से चुनौतीपूर्ण रोल भी किये, जिनमे मुख्य रूप से अंदाज़ (1971) में एक विधवा और लाल पत्थर (1971) में एक गरीब महिला का रोल शामिल है। 1972 में मालिनी ने सीता और गीता में धर्मेन्द्र और संजीव कपूर के साथ काम किया।
  • इस फिल्म के लिए मालिनी को फिल्मफेयर का बेस्ट एक्ट्रेस का अवार्ड भी मिला था। डेब्यू करने के चार साल बाद ही, मालिनी को खुद को बॉलीवुड की सबसे सफल और मुख्य अभिनेत्रियों में शामिल किया। 1970 में आयी मालिनी की फिल्मों  में सन्यासी (1975), धर्मात्मा , प्रतिज्ञा (1975) शामिल है।
  • फिल्म शोले (1975) में उन्होंने बसंती नाम की लड़की का रोल किया था। जो काफी प्रसिद्ध हुआ। इस समय में की गयी उनकी दूसरी फिल्मो में त्रिशूल, जोशीला, ख़ुशबू (1975), किनारा (1977) और मीरा (1979) शामिल है।
  • शादी के बाद मालिनी ने बहुत सी फिल्मे की जिनमे मुख्य रूप से क्रांति, नसीब (1981), सत्ते पे सत्ता, राजपूत और एक नयी पहेली (1984)। इसके बाद उन्होंने राजेश खन्ना के साथ बहुत सी फिल्मे की, जिसके चलते टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने उन्हें टॉप फिल्म कपल का दर्जा दिया। इस समय में किये गये उनके कार्यो में आंधी तूफ़ान, दुर्गा (1985), रामकली (1985), सीतापुर की गीता (1987), एक चादर मैली सी (1986), रिहाई और जमाई राजा (1985) शामिल है।
  •  दिव्या भारती और शाहरुख़ खान के साथ मिलकर दिल आशना है, फिल्म को डायरेक्ट भी किया । इसके बाद मालिनी डांस और टेलीविज़न कार्यो पर ज्यादा ध्यान देने लगी थी।
  • वर्ष 1990 में हेमा मालिनी ने छोटे पर्दे की ओर भी रूख किया और धारावाहिक नुपूर का निर्देशन भी किया। इसके बाद वर्ष 1992 में फिल्म अभिनेता शाहरूख खान को लेकर उन्होंने फिल्म (दिल आशना है) का निर्माण और निर्देशन किया। वर्ष 1995 में उन्होंने छोटे पर्दे के लिए मोहिनी का निर्माण और निर्देशन किया।
  • कई सालों से फिल्मों से दूर रहने के बाद ने फिल्म बागबान 2003 से फिल्मों में वापसी की थी। इसके लिए उनका फिल्मफेयर के बेस्ट एक्ट्रेस अवार्ड के लिए नामनिर्देशन भी किया गया था।
  • इसके बाद उन्होंने 2004 में आयी फिल्म वीर-झारा में एक छोटा किरदार भी निभाया था। इसके बाद 2011 में उन्होंने अपनी दूसरी फिल्म टेल मी ओह खुदा डायरेक्ट की, जिसमे उनके पति धर्मेन्द्र और बेटी ईशा देओल ने काम किया था।

हेमा मालिनी का राजनीतिक सफर  –

1999 में हेमा मालिनी भारतीय जनता पार्टी  से जुड़ी। लेकिन अधिकारिक रूप से 2003 से 2009 तक वह भारतीय जनता पार्टी की नियुक्त उमीदवार थी,
इसके बाद मार्च 2010 में मालिनी बीजेपी की जनरल सेक्रेटरी बनी। 2014 में लोकसभा के साधारण चुनाव में  मालिनी ने मथुरा से जयंत चौधरी को 3,30,743 वोटो से परास्त किया। इसी के साथ उनकी नियुक्ति लोक सभा के सदस्य के रूप में की गयी । हेमा मालिनी आज भी लाखों दिलों पर राज करती हैं। बढ़ती उम्र से भी उनकी सुंदरता और चाहतों  में कोई कमी नहीं आयी। उनका जीवन महिलाओं  के लिए भी प्रेरणादायक है। हम उन्हें नारी शक्ति का उदाहरण कहे तो भी कोई अतिशयोक्ति नहीं होंगी।

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